लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान की सांसदी को हाईकोर्ट में चुनौती, यौन उत्पीड़न से जुड़ा है सारा मामला
बिहार राज्य के हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान की सांसदी को दिल्ली उच्च न्यायलय में चुनौती दी गई है । इस दौरान दिल्ली उच्च न्यायलय ने कहा कि आपको यह याचिका पटना उच्च न्यायलय में दायर की जानी चाहिए। अब इस चुनाव याचिका पर सुनवाई 28 अगस्त 2024 को होगी।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से कहा कि इस उच्च न्यायलय में यह कैसे स्वीकार्य है? जो निर्वाचन क्षेत्र बिहार में है। और बेहतर होगा कि आप याचिका वापस ली जाये और अधिकार क्षेत्र वाले पटना उच्च न्यायलय में जाएं। और न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा है कि इस अदालत के पास अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है ।
यौन उत्पीड़न का है सारा मामला
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया कि प्रिंस राज, उसके सहयोगियों ने उसका यौन उत्पीड़न किया गया, जिसमें लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान भी शामिल थे। और उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय इस "आपराधिक पृष्ठभूमि" का खुलासा ही नहीं किया था। आप को बता दें कि प्रिंस राज चिराग पासवान का चचेरा भाई है।
2021 में दर्ज कराई प्रथम सूचना रिपोर्ट
जब याचिका में कहा है कि कथित तोर पर यौन उत्पीड़न के संबंध में 2021 में ही दिल्ली में एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR ) दर्ज की गई थी। और याचिका में कहा गया है कि आपराधिक मामलों के संबंध में झूठा हलफनामा दाखिल करना या हलफनामे में कोई भी जानकारी भी छिपाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए का उल्लंघन करती है और इस कारण से छह महीने की सजा हो सकती है।
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क्या याचिकाकर्ता नहीं दे सकता चुनौती
चुनाव आयोग के अधिवक्ता सिद्धांत कुमार ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका यहां विचारणीय नहीं है, और चुनाव बिहार में हुए थे। केंद्र की तरफ से मामले में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल श्री चेतन शर्मा ने आगे तर्क दिया कि कानून के तहत, केवल निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता या उम्मीदवार ही चुनाव को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर करे और याचिकाकर्ता उभय में से किसी भी श्रेणी में नहीं आता है।
और उन्होंने यह भी कहा, अधिनियम स्पष्ट है।कि उसका अधिकार क्षेत्र सवालों के घेरे में है। और आपको निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए या आपको उम्मीदवार होना चाहिए था । और योग्यता बाद में आएगी, पहले याचिकाकर्ता को बाधा पार करनी होगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अगली सुनवाई पर याचिका पर विचार करने के लिए उच्च न्यायलय के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर आगे चर्चा करने के लिए से समय भी मांगा।
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