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अधिवक्ता विरोधी काला कानून कतई स्वीकार्य नहीं- सरोज यादव एडवोकेट

Published on: 05-Feb-2026

अधिवक्ता विरोधी काला कानून कतई स्वीकार्य नहीं- सरोज यादव एडवोकेट

आगरा। आगरा सेशन कोर्ट के अधिवक्ताओं ने एडवोकेट एक्ट में किए गए अधिवक्ता विरोधी संशोधन के विरोध में आज प्रदर्शन किया। कोर्ट परिसर में जुलूस निकाला गया। इसके बाद एमजी रोड पर नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एडवोकेट सरोज यादव ने कहा कि अधिवक्ता समुदाय केंद्र सरकार की गलत मंशा से वाकिफ हो चुका है और किसी भी तरह के झांसे में नहीं आएगा। अगर आंदोलन के बाद सरकार काला कानून वापस ले रही है तो वकीलों के हित में संशोधन कर नया मसौदा अधिवक्ता समुदाय के बीच विचार के लिए पेश करे।

अगर मसौदा वकीलों के हित में होगा तो ही वकील उसे स्वीकार करेंगे, अन्यथा वकीलों का आंदोलन जारी रहेगा। एडवोकेट सरोज यादव ने कहा कि अधिवक्ता लंबे समय से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग कर रहे हैं। सरकार इस प्रोटेक्शन एक्ट को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रही है, उल्टा काला कानून लाकर अधिवक्ताओं के संवैधानिक अधिकारों को कुचलना चाहती है, जिसे अधिवक्ता कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हापुड़ लाठीचार्ज के बाद प्रदेश सरकार ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का आश्वासन दिया था

लेकिन सरकार आज तक अपने वादे पर खरी नहीं उतरी। इसलिए अधिवक्ता समुदाय सरकार द्वारा संशोधन विधेयक पर दिए गए आश्वासनों के बहकावे में आकर आंदोलन की राह से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र व प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं के हित में विधेयक नहीं लाती है तो सरकार को वकीलों के विरोध का सामना करना पड़ेगा। जिसके परिणाम गंभीर होंगे। केंद्र सरकार लोकतंत्र के निष्पक्ष व स्वतंत्र स्तंभ न्याय व्यवस्था को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने की साजिश कर रही है। इसी मंशा से केंद्र सरकार एडवोकेट एक्ट संशोधन विधेयक 2025 को लेकर कदम उठा रही है।

यह अधिवक्ता विरोधी काला कानून है जो अधिवक्ताओं को कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं को सुरक्षा देने के बजाय अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज को दबाना चाहती है। इसलिए वह एडवोकेट एक्ट में संशोधन के नाम पर काला कानून लागू करने की तैयारी कर रही है। संशोधन की आड़ में तैयार किए जा रहे इस काले कानून को अधिवक्ता समुदाय कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस तरह केंद्र सरकार को किसान विरोधी बिल वापस लेना पड़ा, उसी तरह इस काले कानून का विचार भी त्यागना होगा।

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